नवरात्रि व्रत कैसे/कियो मनाये, नवरात्रि में किया खाना चाहिए पूरी जानकारी हिंदी में

navratri varat kaise or kyu manaya jata hai in hindi

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इस देश में हिंदू धर्म के लोग अनेक देवी-देवताओं को मानते हैं ।

इनमें से एक नवरात्रि भी आती है। इसके बाद दसवें दिन दशहरा भी आता है । नवरात्रि प्रतिवर्ष भारत में दो बार मनाया जाता है।

नवरात्रि कैसे बनाया जाता है

इन नवरात्रि में हम नौ देवियों को पूजते हैं तथा उनके लिए व्रत रखते हैं। नवरात्रों में देवी के नौ रूपों को पूजा जाता है। घर के मंदिरों में 9 दिन तक पूजा-पाठ चलता है और घी के दिए ही जलाए जाते हैं।

रात में या दिन में मोहल्ले की सभी औरतें इकट्ठा होकर भजन अथवा कीर्तन आदि करवाते हैं और कलश स्थापना भी की जाती है । भले ही भारत में यह त्योहार दो बार मनाया जाता है लेकिन यह दोनों ही अलग-अलग समय पर आते हैं।

देर रात तक मंदिरों में माता का दरबार लगा रहता है । मंदिरों में फिर से सजावट का दौर लगता है । व्रत रखने वाले सभी भक्तगण सुबह नहा धोकर मंदिर में जाते हैं। वहां पर माता के सामने दूध ,जल, फूल और फल आदि का अभिषेक करते हैं ।

मंदिरों में भी तरह-तरह के भजन सुनने को मिलते हैं। लोग सुबह मंदिरों में जाकर देवी लिंग को सम्मान करवाते हैं। उन्हें नए वस्त्र पहन आते हैं तथा भजन का गान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रों के व्रत रखने से देवी मां प्रसन्न रहती है तथा अपने भक्तों पर अश्विन आशीर्वाद देती है ।

नवरात्रि में किया खाना चाहिए

लोग वक्त में अनेक चीजों का सेवन करते हैं जैसे उबला हुआ आलू फ्राई करके खा सकते हैं । ज्यादा अनाज से बचना चाहिए ।कुट्टू के आटे का ही प्रयोग करें सेंधा नमक का प्रयोग करें आलू के चिप्स वगैरा वगैरा भी खा सकते हैं। नवरात्रा को प्रारंभ होने का समय मार्च से अप्रैल के महीने का और फिर सर्दियों के नवरात्रि सितंबर से अक्टूबर के महीने में मनाया जाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा ने एक राक्षस के साथ 9 दिनों तक युद्ध किया था और दसवें दिन विजय प्राप्त की थी । यानी बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी ।नवरात्र में महिलाएं सुबह उठकर घर घर की साफ सफाई करते हैं।

इसके बाद नहा धोकर मंदिर और देवी माता की मूर्तियों की सफाई करके उनकी तस्वीर के सामने सभी प्रकार की सामग्री रखते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि 9 दिनों तक अलग-अलग रंग का प्रयोग किया जाता है  जो नौ देवियों के लिए शुभ होता है ।

भारत में उन नौ देवियों के नाम और रंग का महत्व इस प्रकार से है;

नौ देवियों के नाम

  1. शैलपुत्री :  शैलपुत्री को पहाड़ों की पुत्री भी कहा जाता है। और उनका पसंदीदा रंग लाल है ।जो कि उत्साह उल्लास और शांति का प्रतीक माना जाता है।
  2. ब्रह्मचारिणी : ब्रह्मचारिणी को तब आचरण करने वाली माना जाता है ।इनका पसंदीदा रंग पीला होता है। जो कि कुंडलिनी जागरण के लिए शक्ति प्रदान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है|
  3. चंद्र घटेती : चांद की तरह चमकने वाली चंद्र घटेती के नाम से ही जाने जाती है ।जिसका पसंदीदा रंग हरा होता है ।सुख शांति के प्राप्ति के लिए हरे रंग को शुभ माना जाता है|
  4. कुष्मांडा : ऐसा माना जाता है कि पूरा जगत उनके पैरों के नीचे होता है ।उनके शुभ रंग सलेटी से रोग दूर होते हैं। धन यश और वैभव की प्राप्ति होती है|
  5. स्कंदमाता : सकंद माता ही कार्तिक स्वामी की माता माने जाते हैं ।इनके शुभ रंग नारंगी होता है। और शुभ फल की प्राप्ति के लिए सकंद माता का गुणगान किया जाता है|
  6. कात्यायनी : कात्यायन आश्रम में जन्मी  के नाम से भी जाने जाते हैं ।इसका शुभ रंग सफेद होता है। जो कि शांति का प्रतीक माना गया है|
  7. कालरात्रि : काल का विनाश करने वाली काल रात्रि को काली के नाम से भी जाना जाता है। इनका पसंदीदा रंग गुलाबी होता है ।शुभ कार्य का प्रतीक होता है।
  8. महागौरी : महागौरी प्रसंता का संचार होती है ।इनका शुभ रंग आसमानी नीला होता है। जो अश्विन शांति का प्रतीक होता है|
  9. सिद्धि दायी : चंद्रमा की पूजा के लिए सर्वोत्तम सिद्धि दायी को ही माना जाता है। और इसका शुभ रंग हल्का नीला होता है। यह सब को सर्व सिद्धि देने वाला होता है।

नवरात्रि के बारे में प्रचलित कथा

 नवरात्रों के लिए दो पौराणिक कथाओं का वर्णन मिलता है। और दोनों मैं ही बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्त हुई थी ।

पुराने समय में एक महिषासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा के लिए तप किया था। तो ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर दर्शन  दिए तब महिषासुर ने उनसे यह वरदान मांगा था। कि पृथ्वी पर रहने वाला कोई भी मानव दाना मनुष्य वीर आदि कोई भी उसे ना हरा पाए ।

नवरात्रि व्रत कैसे/कियो मनाये हिंदी में

उसके  तपस्या खुश होकर ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया था। लेकिन वरदान मिलते ही वह अहंकारी हो गया। और पृथ्वी पर तबाही मचाना लगा। ऐसा देखकर लोगों ने देवी देवता से मदद मांगी थी। कि कोई उसे रोक दें जो भी कोई उसे रोकने के लिए आता उसे मार देता था। तभी ब्रह्मा महेश विष्णु इंदर  शिव आदि ने मिलकर एक शक्ति द्वारा मां दुर्गा को जन्म दिया।

ऐसा माना जाता है की मां दुर्गा ने हीं उसके साथ 10 दिन युद्ध किया था। यानी मां दुर्गा ने 9 दिन लगातार महिषासुर के साथ युद्ध किया था। और दसवें दिन बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी। एक ऐसी ही पौराणिक कथा राम और रावण के बीच भी हुई थी। ऐसा माना जाता है कि राम ने अपने पत्नी सीता को लंका से वापस लाने के लिए रावण से 10 दिन का युद्ध करना पड़ा था। 

रावण ने माता सीता का अपहरण कर उसे अपने लंका में रखा है। और उसके चारों ओर दासी को भी रखा गया।  राम ने रावण के साथ 9 दिन युद्ध किया। और दसवें दिन बुराई पर अच्छाई की विजय हुई। ऐसा माना जाता है कि नवरात्र भी इन दिनों पर आधारित है और यह 9 दिन देवी मां के लिए प्रमुख है। देवी मां का व्रत रखने से देवी मां खुश होती हैं। और अपार कृपा बरसाते हैं ।बुराई पर अच्छाई की विजय होना  नवरात्रों के लिए विशेष  उत्सव है।

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